सुल्तानपुर जिले के नंदौली गांव में एक ऐसे किसान हैं, जो परंपरागत खेती से आगे बढ़कर नवाचार और जैविक विविधता को अपनाकर एक मिसाल पेश कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं प्रगतिशील किसान जमील अहमद की, जिनकी मिनी बागवानी आज क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
🌱 जब खेत बना बग़ीचा
बल्दीराय तहसील के नंदौली गांव में स्थित जमील अहमद की यह बागवानी छोटे आकार में होने के बावजूद कई मायनों में बड़ी है। यहाँ आम, इमली, अमरूद और विभिन्न मसालेदार पौधों की कई प्रजातियाँ एक ही स्थान पर देखी जा सकती हैं। यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए एक प्रेरणा भी है कि खेती केवल अन्न उगाने तक सीमित नहीं।
👨🌾 कस्तूरी आम: स्वाद और सेहत का दुर्लभ संगम
इस विशेष अवसर पर एक कस्तूरी प्रजाति के आम का पौधा भी रोपा गया। जमील अहमद ने बताया कि यह प्रजाति मुख्यतः बोर्निया में पाई जाती है और अपने अनोखे स्वाद के लिए मशहूर है।
इसका स्वाद मीठा और तीखा होता है, जिसमें नींबू और मसालों का हल्का सा एहसास आता है। साथ ही यह विटामिन A, C और फाइबर से भरपूर होता है – यानी स्वाद और सेहत दोनों का अद्भुत मेल।
🏛️ अधिकारी भी हुए प्रभावित
इस बागवानी का अवलोकन करने पहुंचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी अय्यूब हुसैन और पूर्व संयुक्त निदेशक कृषि आनंद कुमार त्रिपाठी ने जमील अहमद के प्रयासों की भरपूर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे किसान देश की कृषि प्रणाली को आत्मनिर्भर और नवाचारी बना रहे हैं।
🙌 गांव बना प्रेरणा स्थल
कार्यक्रम में गांव के गणमान्य व्यक्ति – शिक्षक शमीम खान, त्रिभुवन, अरमान, रुस्तम सहित कई लोग मौजूद रहे। सभी ने जमील अहमद के इस प्रयास को न केवल देखा बल्कि अपने-अपने स्तर पर इसे अपनाने की बात भी कही।
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✨ निष्कर्ष
जमील अहमद जैसे किसान यह साबित कर रहे हैं कि अगर सोच में बदलाव हो तो जमीन भी सोना उगल सकती है।
उनकी मिनी बागवानी न सिर्फ आय का साधन है, बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और नवाचार की दिशा में एक ठोस कदम भी।
> आइए, हम सभी जमील अहमद जैसे किसानों से प्रेरणा लें और अपनी ज़मीन से जुड़कर हरियाली और खुशहाली की ओर कदम बढ़ाएँ।